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महिलाएं जानवरों को कराती हैं फीडिंग, बच्चों की तरह करती हैं परवरिश

शेफ विकास खन्ना ने अपने इंस्टाग्राम और ट्विटर एकाउंट पर हिरण के बच्चें को दूध पिलाती फोटो शेयर की है।

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जयपुर/नई दिल्ली। राजस्थान के बीकानेर में एक समाज ऐसा है जो जानवरों को बच्चों की तरह पालते हैं। यहां महिलाएं सिर्फ जानवरों की बच्चों की तरह देखभाल ही नहीं करती बल्कि उन्हें अपना दूध भी पिलाती हैं। हाल ही में फेमस शेफ विकास खन्ना ने अपने इंस्टाग्राम और ट्विटर एकाउंट पर हिरण के बच्चें को दूध पिलाती हुई फोटो शेयर की है।

ऐसे बचाते हैं घायल हिरणों के बच्चों को

– शेफ विकास खन्ना ने इंस्टाग्राम और ट्विटर पर फोटो शेयर करते हुए लिखा कि मानवता का सबसे बड़ा रूप दया भावना हैं। उन्हें बिश्नोई समाज की महिला ने बताया कि वे रेगिस्तान में घायल और अपने झुंड से बिछड़ चुके हिरणों और चिंकारा को पालते हैं। उनकी देखभाल करती हैं । वे हिरण के बच्चों को दूध पिलाकर बड़ा करती हैं।
– राजस्थान करीब 500 सालों से बिश्नोई समाज के लोग जानवरों की देखभाल करते आ रहे है। वे उन्हें बच्चों की तरह पालते है और उनकी देखभाल करते हैं।यहां महिलाओं के आलावा पुरुष भी जानवरों की बराबरी से देखभाल करते हैं। लावारिस और अनाथ हो चुके हिरण के बच्चों को अपने घरों में परिवार की तरह पालते हैं। इस समाज की महिलाएं खुद को हिरण के इन बच्चों की मां कहती हैं।

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क्या हैं इस समाज की कहानी
– भगवान विष्णु के नाम पर इस समाज का नाम पड़ा। ये लोग पर्यावरण की पूजा करते हैं। साथ ही ये रेगिस्तान और जंगलों के पास रहते हैं।लोग हिंदू गुरु श्री जम्भेश्वर भगवान को मानते हैं। वे बीकानेर से थे। इस समाज के लोग उनके बताए 29 नियमों का कड़ाई से पालन करते हैं।

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चिपको आंदोलन में निभाई थी अहम भूमिका
– पर्यावरण की पूजा करने वाले इन लोगों ने साल 1736 में पेड़ों को बचाने के लिए चलाए चिपको आंदोलन में हिस्सा लिया। जोधपुर के पास खेजड़ली गांव के करीब 363 लोगों ने जान देकर पेड़ों को बचाया था।

– खेजड़ली की अमृतादेवी बिश्नोई ने लोगों को गुरु जम्भेश्वर महाराज की कसम दिलाई और पेड़ से चिपक गईं। इस पर बाकी लोग भी पेड़ों से चिपक गए। फिर संघर्ष में एक के बाद एक 363 लोग मारे गए।