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माेहल्ले का प्यार था, हर सुबह दीदार होता था; ऐसी है मोहब्बत से मौत तक की स्टाेरी

16 नवंबर को प्रेम प्रसंग में घर से भागी थी खुशबू, 18 को प्रेमी की मिली थी लाश, 52वां दिन प्रेमिका की गई जान

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धनबाद(झारखंड).16 नवंबर 2017 को खुशबू अपने पड़ोस के योगेश कुमार के साथ लव अफेयर में भागी। 19 नवंबर 2017 को प्रेमी योगेश की लाश दुग्धा में रेलवे पटरी पर मिली। 9 जनवरी 2018 को खुशबू की जली हुई लाश मामा के किचन में मिली। पहले प्रेमी और अब प्रेमिका की हुई संदिग्ध मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं दोनों खुशबू-योगेश की प्रेम कहानी पुटकी के उस मोहल्ले में चर्चित हो गई है, जहां दोनों एक-दूसरे के पड़ोसी थे। दोनों को जानने वाले कहते हैं कि तीन सालों तक इनका प्रेम समाज से छुपा रहा। दोनों को खिड़की पर आने का बस बहाना चाहिए था। एक दीदार के लिए दोनों तड़पते थे। योगेश के दोस्त बताते हैं कि खुशबू को लेकर वह कुछ लोगों से बात करता था। यही कारण था कि कुछ मित्रों को छोड़, इनकी प्रेम कहानी की जानकारी किसी को नहीं थी।

love story couple khushboo and yogesh 2 माेहल्ले का प्यार था, हर सुबह दीदार होता था; ऐसी है मोहब्बत से मौत तक की स्टाेरी

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15 नवंबर 2017 को दोनों ने अपने प्रेम को जग जाहिर कर दिया। दोनों का परिवार विरोध में खड़ा हो गया। योगेश और खुशबू दोनों ने घर छोड़ दिया। दोनों भाग कर रांची पहुंच गए। दो दिन हुए होंगे… खुशबू के परिवार वालों ने उन्हें खोज निकाला। वे खुशबू को जबरन धनबाद ले आएं। इधर, 16 नवंबर 2017 को योगेश की मौत की खबर खुशबू को मिली। दुग्धा स्थित रेलवे लाइन पर योगेश मरा पड़ा था। योगेश के परिवार वालों ने खुशबू के परिवार पर हत्या की एफआईआर दर्ज करायी। खुशबू के पिता, चाचा और फुफेरा भाई तेनुघाट जेल में हैं।

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अकेली थी, तन्हा थी, यादों में योगेश था : अंतत: खुशबू भी इस दुनिया में नहीं रही

योगेश की मौत के बाद खुशबू अकेली थी। वह तन्हा थी। योगेश अब सिर्फ उसकी यादों में था। अब घर की खिड़की से योगेश नजर नहीं आता था। घर वालों ने उसका मन बदलने के लिए उसका जगह बदल दिया। उसे मामा के भूली स्थित घर पहुंचा दिया गया। दुग्धा पुलिस की मानें तो योगेश की हत्या के मामले में खुशबू महत्वपूर्ण गवाह थी। शायद वह योगेश को लेकर अपने परिवार के खिलाफ गवाही थी। पुलिस उसकी गवाही कराना चाहती थी, पर वह ऐसा न कर सकी। 8 जनवरी 2018 की रात खुशबू की भी संदिग्ध मौत हो गई।

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दोस्तों ने कहा -एक-दूसरे पर जान छिड़कते थे दोनों

योगेश और खुशबू के कुछ दोस्तों से भास्कर की टीम ने बातचीत की। पहले तो वे कुछ भी बताने से इनकार कर रहे थे। वे बार-बार यही कह रहे थे कि जो होना था सो हो गया। अब उनके बारे में बात करने से क्या फायदा? बहुत कुरेदने पर उन्होंने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि वे एक दूसरे पर जान छिड़कते थे। सुबह की शुरुआत दोनों की मिलन से ही होती थी। इनकी दोस्ती की मिशाल हम लोग दिया करते थे। दोनों एक दूसरे को खूब अच्छी तरह समझते थे।

उठ रहे हैं ये सवाल

1. पेट में नहीं था अनाज का दाना
मां की माने तो खुशबू सहित पूरे परिवार ने रात 9:30 बजे खाना खाए थे। पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताता है कि खुशबू ने कुछ नहीं खाया था। वह भूखी थी। उसके पेट में अनाज का एक भी दाना नहीं था।
2. किचन में सभी सामान व्यवस्थित
किसी के शरीर में आग लगी हो और वह स्थिर रहे… यह संभव नहीं है। पुलिस का कहना है कि अगर किचन में आग लगाई होती तो उसके इधर-उधर भागने से किचन का सामान बिखरा जाता। पर किचन में ऐसा कुछ नहीं था।
3. न धुंआ उठा, न कोई सामान जला
किचन में आग लगाई… पर न कोई सामान जला और न ही धुंआ उठा। यह कैसे संभव होगा? किचन में पुलिस को कई भी सामान जला हुआ नहीं मिला। न ही किचन की कोई दीवार पर धुंआ मिला।
4. किसी ने चीख क्यों नहीं सुनी
कोई जल रहा हो और चीखे नही… यह भी संभव नहीं है। अगर किचन खुशबू आग लगाती तो उसकी चीख घर वाले और आसपास के लोग जरूर सुनते। पर यहां ऐसा नहीं हुआ।