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इस गाँव में सुहागरात का नियम है,ऐसा कि आप सोच भी नही सकते हैं

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नमस्ते दोस्तों आप सभी का स्वागत है . दोस्तों लड़का हो या लड़की शादी के बाद सुहागरात का बेसब्री से इंतजार रहता है.उनके मन में कई तरह के बातें चलती रहती है कि सुहागरात के दिन को यादगार के रूप में मनाएंगे लेकिन एक ऐसा गाँव हैं जहाँ का नियम जानकर दंग रह जायेंगे.

दोस्तों,जिस गाँव की हम बात करने जा रहे हैं.उस गाँव का नाम है-कंजर भाट.जैसा कि आप सभी जानते हैं कि शादी के बाद लड़का-लड़की एक रूम में अकेला छोड़ दिया जाता है कि वे आपस में बात-चित कर सकें और सुहागरात का इंजॉय अपने हिसाब से करें.ताकि उनका जीवन ठीक से बीते और कोई उलझन न हो.

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लेकिन हम जिस गावं की हम बात कर रहे हैं वहां का नियम ही एकदम अलग है.वह का नियम है कि जब कोई नए कपल्स अपने जीवन की शुरुआत करते हैं तो उस गाँव के लोग उसके कमरे के बाहर बैठे रहते हैं.यहाँ तक की गाँव का सरपंच भी साथ में बैठा रहता है.हालाँकि यह नियम एकदम गलत है.सारे के सारे गाँव के लोग रात भर बैठे रहते है.हालाँकि यह बहुत शर्मनाक बात है.लेकिन फिर भी देश डीके एक समुदाय इस अजीबो-गरीब नियम को निभाता है.जो कि 20 बर्षों से इस शर्मशार कर देने वाला परम्परा को निभा रहा है.लेकिन अब आपके मन में ये सवाल उठ रहा होगा कि लोग ऐसा क्यों करते हैं.तो हम आपको जानकारी दे दें कि लोग इस परंपरा को इसलिए निभाते हैं कि वह नै दुल्हन के चरित्र को जान सकें.

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इस गाँव के लोग नए जोड़े को सुहागरात के दिन नए चादर सफ़ेद रंग के उनके बेड पर बिछाने के लिए देते हैं.इसलिए कि खून का दाग उस चादर पर रह सके.सुहागरात मानाने के बाद दूल्हा उस चादर को ले जाकर सीधे सरपंच को देता है.अगर चादर पर खून का दाग लगा हो तो ठीक अगर नही लगा हो तो दुल्हन को कुलता समझकर पिट-पीटकर गाँव से बहार निकाल दिया जाता है.